आरिफ नियाज़ी।
मोहर्रम के अवसर पर राहत फॉर एवरीवन फाउंडेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष एडवोकेट राव बिलावर ने कहा कि कर्बला का वाकया केवल एक धार्मिक घटना नहीं, बल्कि इंसानियत, न्याय, सत्य और मानव मूल्यों की रक्षा के लिए दी गई महान कुर्बानी का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) ने अत्याचार, अन्याय और झूठ के सामने सिर झुकाने के बजाय शहादत को स्वीकार किया। कर्बला का संदेश यह है कि सच्चाई और इंसाफ की राह कठिन अवश्य हो सकती है, लेकिन अंततः जीत उसी की होती है। यज़ीद की ताकत और सत्ता समय के साथ समाप्त हो गई, जबकि इमाम हुसैन (अ.स.) का नाम आज भी पूरी दुनिया में सम्मान और श्रद्धा के साथ लिया जाता है।
एडवोकेट राव बिलावर ने कहा कि कर्बला हमें मानवता की सेवा, भाईचारे, प्रेम और कमजोरों के अधिकारों की रक्षा का संदेश देती है। मोहर्रम का महीना हमें यह सीख देता है कि हर परिस्थिति में सत्य, न्याय और इंसानियत का साथ देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज समाज को कर्बला के उस संदेश को अपनाने की आवश्यकता है, जिसमें नफरत के बजाय मोहब्बत, अन्याय के बजाय न्याय और स्वार्थ के बजाय मानव सेवा को महत्व दिया गया है। इमाम हुसैन (अ.स.) की शहादत सदैव सत्य, साहस और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती रहेगी।
“कर्बला की मिट्टी से आज भी यही सदा आती है,
सच्चाई कभी हारती नहीं, झूठ की उम्र छोटी होती है।
यज़ीद की सत्ता मिट गई, हुसैन का पैगाम बाकी है,
इंसानियत, न्याय और मोहब्बत का नाम बाकी है।”





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