उत्तराखंड विद्युत अधिकारी–कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा, रुड़की के आह्वान पर बिजली के निजीकरण और डाकपत्थर स्थित पिटकुल की कीमती भूमि निजी हाथों में दिए जाने के विरोध में अधीक्षण अभियंता के मंडल कार्यालय पर जोरदार धरना–प्रदर्शन किया गया। इस दौरान ऊर्जा निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और चेतावनी दी कि यदि जनविरोधी फैसले वापस नहीं लिए गए तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

धरने को संबोधित करते हुए ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता अनिल मिश्रा ने कहा कि बिजली जैसे आवश्यक जनसेवा क्षेत्र का निजीकरण आम उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ है। इससे न केवल बिजली महंगी होगी, बल्कि कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाएगी। वहीं डाकपत्थर में पिटकुल की भूमि निजी हाथों में देने को सार्वजनिक संपत्ति के साथ खिलवाड़ बताया गया।

संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार द्वारा लगातार सरकारी परिसंपत्तियों को निजी कंपनियों को सौंपने की नीति अपनाई जा रही है, जिससे राज्य और जनता दोनों को नुकसान होगा। वक्ताओं ने साफ कहा कि कर्मचारी किसी भी कीमत पर इस फैसले को स्वीकार नहीं करेंगे और जरूरत पड़ी तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
धरना–प्रदर्शन में प्रमुख रूप से अधीक्षण अभियंता विवेक राजपूत, , विनोद पांडेय, आशुतोष तिवारी, अनूप सैनी, एसडीओ अनुभव सैनी, मोहम्मद रिज़वान, मोहम्मद उस्मान, पंकज गौतम, एसडीओ धनौरी अश्वनी कुमार, बिजली कर्मचारी संघ के अध्यक्ष रविन्द्र कुमार शर्मा, संजीव चौहान, दीपक शांडिल्य, सुरेन्द्र शर्मा सहित बड़ी संख्या में अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
अंत में संघर्ष मोर्चा ने सरकार से मांग की कि बिजली के निजीकरण और पिटकुल की भूमि को निजी हाथों में देने के निर्णय को तत्काल वापस लिया जाए, अन्यथा आंदोलन को निर्णायक मोड़ दिया जाएगा।





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