आरिफ नियाज़ी
मंगलौर जश्न-ए-इमाम हुसैन कार्यक्रम के पचास वर्ष पूरे होने के अवसर पर इस वर्ष मंगलौर में इसकी गोल्डन जुबली बड़े ही धूमधाम और भव्यता के साथ मनाई जा रही है। यह आयोजन ना सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक बनेगा, बल्कि गंगा-जमुनी तहज़ीब और आपसी सौहार्द की भी शानदार मिसाल पेश करेगा।

गोल्डन जुबली समारोह में जहाँ पांच मुस्लिम धर्मगुरु शिरकत करेंगे, वहीं छह हिन्दू धर्मगुरुओं को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। कार्यक्रम को और अधिक यादगार बनाने के लिए 7 फरवरी को एक अज़ीमुशान मुशायरे का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें देश के नामचीन शायर हिस्सा लेंगे।
इस भव्य आयोजन में कई न्यायाधीशों और आईएएस अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति भी रहेगी।
कार्यक्रम को लेकर आयोजित प्रेस वार्ता में जानकारी देते हुए मशहूर शायर अतहर काज़मी ने कहा कि इस अवसर पर हज़रत इमाम हुसैन के जीवन, उनके बलिदान और इंसानियत के संदेश पर विस्तार से प्रकाश डाला जाएगा।उन्होने कहा की हज़रत इमाम हुसैन ने इंसानियत भाईचारे का पैगाम दिया जिसे आज पूरी दुनिया के लोग समझते हैं
करबला के मैदान में हज़रत इमाम हुसैन ने दिया की वह सच्चाई के साथ थे उन्होंने अपनी जान देना मुनासीब समझा लेकिन यज़ीद के हाथ पर बैत नहीं की आज दुनिया में इमाम हुसैन को याद किया जाता है जबकि यज़ीद का नाम लेने वाला कोई नहीं है।
प्रेस वार्ता के दौरान पद्मश्री अख्तर वासे, प्रो. नासिर नकवी, प्रो. तनवीर चिश्ती, कार्यक्रम आयोजक सैयद अली हैदर ज़ैदी, कौसर ज़ैदी, मौलाना ग़ज़नफ़र जब्बार, सैयद काज़मी, रईस ज़ैदी, सैयद यावर अली ज़ैदी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।





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