आरिफ नियाज़ी।
रुड़की। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संघर्ष समिति एवं अशोक नगर क्षेत्रीय विकास समिति द्वारा सबसे पहले राज्य के लिए शहीद होने वाले आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि दी गई।
इसके बाद सांस्कृतिक संध्या में गढ़वाल और कुमाऊनी संस्कृति की झलक देखने को मिली। जिसमें कलाकारों ने पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुत किए तो वहीं कार्यक्रम के आयोजक भी मंच पर नृत्य करते नज़र आए। पारंपरिक वेशभूषाएं पहनीं और लोकगीतों से माहौल को सराबोर कर दिया। पंडाल में बैठे लोग कलाकारों का तालियों से होंसला बढ़ा रहे थे।
ढंडेरा में आयोजित कार्यक्रम देर शाम तक चला। इस अवसर पर उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संघर्ष समिति के केंद्रीय अध्यक्ष हर्ष प्रकाश काला ने कहा कि हमने जिस जल, जंगल, जमीन और जवानी को बचाने के लिए उत्तराखंड बनाया था आज वह उसे बचाने में असफल रहे हैं। आजतक की जो भी सरकारें उत्तराखंड में बनी हैं वे इन सभी को बचाने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि सभी को एकजुट होकर प्रदेश के हित में लड़ाई लड़ने की आवश्यकता है।
इससे पूर्व 95 वर्षीय राज्य आंदोलनकारी चंद्रमा देवी रावत, राम सिंह रावत, 92 वर्षीय बसंती रावत ने दीप प्रज्जवलित करते हुए कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम क़ो भव्य बनाने के लिए आयोजकों ने कड़ी मेहनत की थी जिसके चलते पर्वतीय मूल के लोगों की भारी भीड़ उमड़ी थी लेकिन किसी भी दल के नेता क़ो कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया गया था।
कार्यक्रम का संचालन गणेश गोदियाल, जीवानंद बुड़ाकोटी और हर्ष प्रकाश काला ने सयुंक्त रूप से किया। उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।
कार्यक्रम में कुसुम काला, प्रदीप रावत, कमला बमौला, राजेंद्र सिंह रावत,भुवनेशवरी देवी, प्रेम गोदियाल, छम्मन सिंह रावत, माया राम भट्ट, हरीश डिमरी, रविंद्र पंवार, बच्चन सिंह नेगी, सुरेंद्र सिंह नेगी, विजय सिंह पंवार, नंदा एरी, संतोषी राणा, महेशचंद्र राना कोटि, शकुंतला सती, रेखा नेगी, जयवीर सिंह रावत, गौर सिंह भंडारी, केशर सिंह रावत आदि मौजूद रहे।





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