अमरीका ने भारत के ऊपर टैरिफ 18% कर दिया है। और भारत ने अमेरिका से ट्रेड डील मंजूर कर ली है पूरा भारत इस बात पर खुश हैं कि अमेरिका ने जो 50% टैरिफ लगाया था वह घटा कर अमेरिका ने 18% कर दिया है। जबकि सच्चाई यह है कि अमेरिका ने पहले जो 25% टैरिफ लगाया था उसे घटा कर 18% किया है दूसरा जो 25% है वह तब कम होगा जब भारत रूस से लेने वाला तेल और अन्य व्यापार पूरी तरह से बंद कर देगा।

जो लोग यह सोच रहे है कि भारतीय प्रधानमंत्री मोदी की ने अपना दबाव बना कर यह टैरिफ कम कराया है तो वह गलत सोच रहे है। क्योंकि टैरिफ और ट्रेड डील के पीछे क्या गोपनीय समझौते हुए हैं यह किसी को नहीं पता। यहां ध्यान देने योग्य यह बात है कि इस ट्रेड डील के कारण अमेरिका अपना सामान लगभग 500 मिलियन डॉलर का व्यापार 0% टैरिफ पर भारत से करेगा। इसका मतलब साफ है अमेरिका के उत्पाद बिना किसी टैक्स के भारत में बेचे जाएंगे।
भारत ने अमेरिका से डेरी उत्पाद पर जो डील की है उससे भारत के किसान आने वाले समय में बहुत हानि उठाएंगे। उपरोक्त सभी समीकरण को देखते हुए मुझको ऐसा लगता है कि भारत अमेरिका के दवाब में अपने पुराने मित्र रूस से दूर हो जाएगा। हम एक महाशक्ति अमेरिका के नजदीक तो जा रहे है और दूसरी महाशक्ति जो हमारा पुराना भरोसेमंद मित्र है रूस उससे दूर जा रहे है। क्योंकि अमेरिका का कोई भरोसा नहीं है कि वो कब भारत को धोखा देकर दुश्मन से मिल जाए। मेरी समझ में यह निर्णय भारत के हित में गलत होगा।
क्योंकि हम जो भी रक्षा उपकरण रूस से लेते है रूस हमे उसकी टेक्नोलॉजी भी देता है। जबकि अमेरिका ऐसा नहीं करता। मेरा यह कहना बिल्कुल भी नहीं है कि हमे अमेरिका से अच्छे सम्बन्ध नहीं रखने चाहिए लेकिन हमारी कूट नीति और विदेश नीति ऐसी होनी चाहिए कि जिससे हमारे सम्बन्ध रूस से भी खराब न हो। अमेरिका यह चाहता है कि भारत अपने सम्बन्ध रूस से खत्म कर ले। अगर यह होता है तो यह निर्णय भारत के लिए आत्मघाती साबित होगा।





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