Jan Mudde

No.1 news portal of India

हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने विज्ञान भवन अंतरधार्मिक सम्मेलन में अजमेर शरीफ का किया प्रतिनिधित्व, भारत की ‘एकता में विविधता’ की जीवंत परंपरा को किया उजागर।

Spread the love

आरिफ नियाज़ी।

श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहादत दिवस के पावन अवसर पर, विज्ञान भवन, नई दिल्ली के प्लेनरी हॉल में एक ऐतिहासिक अंतरधार्मिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर दरगाह अजमेर शरीफ के गद्दी नशीन एवं चिश्ती फाउंडेशन के अध्यक्ष हाजी सैयद सलमान चिश्ती की विशेष उपस्थिति और आध्यात्मिक संबोधन ने भारत की सदियों पुरानी शांति, सद्भाव और धार्मिक सह-अस्तित्व की परंपरा को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया।

इस सम्मेलन के मुख्य अतिथि भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन जी रहे। कार्यक्रम का आयोजन पद्म श्री डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी, राज्यसभा सांसद, इंटरनेशनल प्रेसिडेंट – वर्ल्ड पंजाबी ऑर्गनाइजेशन एवं चेयरमैन – ग्लोबल इंटरफेथ हार्मनी फाउंडेशन द्वारा किया गया।

अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन जी ने श्री गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान को मानव इतिहास का अद्वितीय उदाहरण बताते हुए कहा कि यह दूसरों के धर्म और आस्था की रक्षा के लिए दिया गया सर्वोच्च त्याग था। उन्होंने कहा कि भारत की संवैधानिक और सांस्कृतिक शक्ति धार्मिक स्वतंत्रता, संवाद और सहिष्णुता पर आधारित है।

डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी ने कहा कि भारत के गुरुओं, ऋषियों, संतों और सूफी संतों ने मिलकर देश की आध्यात्मिक शक्ति को सुरक्षित रखा है। इसी विरासत के कारण भारत ने आध्यात्मिक मूल्यों और समावेशी विकास को साथ लेकर आगे बढ़ने का मार्ग दिखाया है। उन्होंने अंतरधार्मिक सौहार्द को भारत की सबसे बड़ी नैतिक और सांस्कृतिक पूंजी बताया।

हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने अजमेर शरीफ के आध्यात्मिक संदेश को साझा करते हुए कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी की शहादत, भारत के ऋषियों, सूफी संतों और महापुरुषों की शिक्षाओं के साथ मिलकर मानव गरिमा, अंतरात्मा और आस्था की रक्षा का पवित्र संदेश देती है। उन्होंने कहा कि भारत की असली ताकत उसकी करुणामय विविधता में है, जहां आध्यात्मिकता शांति, सद्भाव और राष्ट्र के सतत विकास का आधार बनती है।
इस सम्मेलन में नांधारी सतगुरु उदय सिंह जी, सिंह साहिब मनजीत सिंह जी (पूर्व जत्थेदार, श्री अकाल तख्त साहिब), जैन आचार्य लोकेश मुनि जी, स्वामी चिदानंद सरस्वती जी, स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज एवं रेव. फादर मोनोडीप डेनियल जी सहित अनेक धर्मगुरुओं ने अपने विचार रखे। सभी वक्ताओं ने शांति, मानवाधिकार और वैश्विक सौहार्द के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया।

अंतरधार्मिक सम्मेलन का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि भारत की शाश्वत आध्यात्मिक परंपराएं—गुरुओं, ऋषियों, संतों और सूफी महापुरुषों की शिक्षाओं के माध्यम से—न केवल देश की आत्मा को सुरक्षित रखती हैं, बल्कि विश्व को एकता, संवाद और शांति का मार्ग भी दिखाती हैं।

error: Content is protected !!
जन मुद्दे के लिए आवश्यकता है उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के सभी जिलो से अनुभवी ब्यूरो चीफ, पत्रकार, कैमरामैन, विज्ञापन प्रतिनिधि की। आप संपर्क करे मो० न० 9719430800,9557227369