आरिफ नियाज़ी।
रूड़की आपदा प्रबंधन, प्रशासन, पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमों ने शहर के विभिन्न स्थानों पर बड़े स्तर पर मॉक ड्रिल का आयोजन किया।
भूकंप जैसी आपदा के दौरान बचाव और राहत कार्यों की वास्तविक तैयारी परखने के लिए डिजिटल ट्विन तकनीक का भी उपयोग किया गया था। सुबह होते ही शहर के कई हिस्सों में सायरन की तेज आवाज गूंजने लगी, जिसके बाद सभी रिस्पांस टीमें तत्परता के साथ निर्धारित स्थानों की ओर रवाना हुईं।
प्रदेशभर में आयोजित इस भूकंप मॉक ड्रिल के लिए रुड़की में बीएसएम इंटर कॉलेज को मुख्य केंद्र बनाया गया था।

नगर निगम और तहसील कार्यालयों में भूकंप की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस और पुलिस की गाड़ियाँ तत्काल मौके की ओर दौड़ पड़ीं। रिलीफ सेंटर के रूप में हरिद्वार–रुड़की विकास प्राधिकरण कार्यालय को चिन्हित किया गया, जहां राहत एवं बचाव से जुड़े सभी अधिकारी और टीमें सक्रिय रहीं।

मॉक ड्रिल के दौरान कई स्थानों पर घायलों को रेस्क्यू कर एम्बुलेंस से सिविल अस्पताल भेजा गया। अस्पताल प्रशासन ने भी इमरजेंसी सिस्टम को सक्रिय करते हुए चिकित्सकों और पैरामेडिकल टीम को अलर्ट पर रखा, ताकि घायलों का तुरंत उपचार किया जा सके। पूरे शहर में एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस वाहनों के सायरन गूंजते रहे, जिससे वास्तविक आपदा जैसी स्थिति का अनुभव कराया गया।
इस अवसर पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट दीपक रामचंद्र शेट ने बताया कि मॉक ड्रिल अपनी तैयारियों, संसाधनों और क्षमताओं को परखने का एक महत्वपूर्ण साधन है। उत्तराखंड भौगोलिक रूप से आपदा संवेदनशील राज्य है, इसलिए पूर्व तैयारी और समुदायों का क्षमता विकास अत्यंत आवश्यक है।





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